साहित्य

महामना मदन मोहन मालवीय जी पर दोहावली

महामना मदन मोहन मालवीय जी पर दोहावली

करती हूँ उर से नमन ,प्रकट करूँ आभार।
मालवीय जी का जतन,दिया हमें आधार ।।

महामना के नाम से ,जाने यह संसार ।
शिक्षाविद के यत्न को, सदा नमन हर बार ।।

एक तरफ संघर्ष था,आजादी की ओर।
शिक्षा थी दूजी तरफ ,लाने स्वर्णिम भोर ।।

हो विद्यालय विश्व का ,स्वप्न लिया आकार ।
शिक्षा भी हो आधुनिक,मन में यही विचार।।

मन में दृढ़ संकल्प था, बौद्धिक पड़े प्रकाश।
अरि सम है अज्ञानता,करती यही विनाश ।।

विद्यालय यह विश्व का,काशी हिंदू नाम ।
आस्था हिंदू धर्म में ,दर्श यही अविराम।।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
विधा-गीत

हिंद-देश के नेता है वे, अटल-बिहारी कहलाते।
जन्म ग्वालियर में था उनका,प्रीति-राग जग सिखलाते ।।

अविवाहित आजीवन ही थे,पत्रकार,शिक्षक न्यारे ।
कोकिल जैसी मधुवाणी में,देते भाषण अति प्यारे ।।
मंत्र-मुग्ध हो संसद सुनता,नहीं झूठ से बहलाते।
हिंद-देश के नेता है वे, अटल-बिहारी कहलाते ।।

लड़े लड़ाई आज़ादी की , बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते ।
कोमल उर वाले कृष्णा सुत,प्रीति-राह हर क्षण देते।।
पक्ष-विपक्ष सभी भूले पद,प्रेम-मंत्र कवि बतलाते।
हिंद देश के नेता है वे, अटल बिहारी कहलाते।।

परमाणु परीक्षण जय-गाथा,जय-भारत की मजबूती।
दिल्ली से लाहौर ‘सदा-ए,सरहद’ बोले ..मधु तूती ।।
भारत रत्न मिला गुरुवर को ,मोदीजी गुरु जस गाते ।
हिंद-देश के नेता है वे, अटल-बिहारी कहलाते।।

वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’
वाराणसी
उ.प्र.

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