साहित्य

रोजगार

अरुण दिव्यांश

विषय : रोजगार

रोजी रोटी की अहम् समस्या ,
चाहे नौकरी या रोजगार मिले ।
कर सकें परिवार का पालन ,
मेरे पेट को भी वह प्यार मिले ।।
सबको अपना जीवन प्यारा ,
सबको जीने का आधार मिले ।
जीने हेतु तो करना है भोजन ,
सबको भरपेट ये आहार मिले ।।
नौकरी सरकारी हो या निजी ,
या कोई भी तो रोजगार मिले ।
खुशहाल हो सबका जीवन ,
खुशमय सबका संसार खिले ।।
भरपाई हो महंगाई फैशन का ,
टूटते रहें इसके हर बार किले ।
करते रहें हम संघर्ष आजीवन ,
महंगाई फैशन ये जड़ से हिले ।।
हल हो जाए रोजी की समस्या ,
जीवन जीने का यह सार मिले ।
जीवन भोजन दिया है जिसने ,
उसको हृदय से आभार मिले ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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