साहित्य

ग़ज़ल

वाई.वेद प्रकाश

दूर हो या पास हो।
प्रेम का एहसास हो।
नफ़रती लिबास में,
कोई भी न पास हो।
सच हमेशा सच रहे,
झूठ का बस नाश हो।
सबकी ज़िन्दगी में,
रोज़ मधुमास हो।
आये न कोई बला,
कोई न उदास हो।
ज़िन्दगी में सभी के,
कोई न संत्रास हो।

वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890

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