
नाम अटल था उनका और अटल ही था व्यक्तित्व,
राष्ट्रप्रेम और कविताओं में ढला हुआ था अस्तित्व।
तीन बार प्रधानमंत्री पद को किया गौरवान्वित,
उनकी वाक् कला और सादगी से विरोधी भी थे प्रभावित।
राष्ट्र धर्म निभाने को रहे सदा अविवाहित,
भीष्म पितामह पदवी को पुनः कर दिया सुशोभित।
जनकल्याण-जनसेवा जिनके जीवन का ध्येय,
नमन करें हम बारम्बार अटल जी थे श्रद्धेय।
युद्ध कारगिल में जिनका नेतृत्व मिला था हमको,
दुश्मनों को मार भगाने का समस्त श्रेय रहा बस उनको।
साहित्य के क्षेत्र में भी रहा उनका बोलबाला,
कविताओं में है धधकती राष्ट्रप्रेम की ज्वाला।
शांतिदूत रहे अटल, लाहौर की दूरी नापी बस से
सद्भावना का बिगुल बजाया गर्वित फिर भी न यश से।
पोखरण परमाणु परीक्षण उपलब्धि रही उनकी,
कावेरी जल-विवाद सुलझाना भी प्राथमिकता थी जिनकी।
ऐसे यशस्वी भारत सपूत ही विजय हुंकार भरते हैं।
उन भारत रत्न अटल जी को प्रणाम हम करते हैं।।
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश




