
जाग मुसाफिर नींद से, सोने में क्या लाभ ।
सूर्य प्रभा चहुँ ओर है,जग में फैली आभ ।।
कर मन प्रभु को याद रे, अंत चलेगा साथ ।
उन चरणों का ध्यान कर, जो सबका है नाथ ।।
रोग योग से दूर कर, रखना स्वस्थ शरीर ।
हाथों की रेखा कहे, मेहनत में तकदीर ।।
निद्रा तंद्रा त्याग कर, करें कर्म से प्रीत ।
स्वागत में आदित्य के, पक्षी गाते गीत ।।
मीठी चुस्की चाय की, आलस देती त्याग ।
चुस्त दुरुस्त होकर करो, दिनचर्या अनुराग ।।
स्नेहिल भोर सुहावनी, शीतल चले बयार ।
लाने को आजीविका, खग मृग चले कतार ।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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