आलेख

तेरे संग चाय का फितूर” रोमांटिक काव्याभिव्यक्ति…..!

मदन वर्मा " माणिक "

—— हां भाई हां यह एक बहुत ही रोमांटिक और काव्यात्मक अभिव्यक्ति है! “तेरे संग चाय का फितूर” का अर्थ है:
याने “तेरे संग” तुम्हारे साथ।”चाय” चाय हो जाये।
“फितूर” अर्थात जुनून, सनक, धुन, या किसी चीज का बहुत गहरा आकर्षण। यह एक तरह का पागलपन भरा शौक होता है
बस चाय हो जाए पसंद के चहेते मित्रों, यारों, जान पहचान वालों के संग, पड़ौसियों संग, पसंदीदा सहकर्मियों संग स्वाद वाली चाय जिसमें जिनको जो पसंद, वह स्वाद आना चाहिए चाहे ग्रुप की चाय हो या अपनी – अपनी स्वाद पसंद वाली चाय हो। बस एक गर्म चाय की प्याली हो संग अपनी मनपसंद जगह, रेस्टोरेंट और मस्ती, हंसी ठिठौली भरा शमा हो, संग
बेहद खुबसूरत नजारे हों, ठंडी हवाएं चल रही हो तो दिल भी
चाय का मजा लेने को मदमस्त हो दिल पर बार-बार अलर्ट आता है चाय पिओ और ताजगी भरी मस्ती संग जियो।

​इस माजरे का मतलब है क्या तो इसका मतलब है कि तुम्हारे साथ चाय पीने की एक गहरी चाहत, लत, या जुनून पैदा हुआ है। यह सिर्फ़ चाय पीने के बारे में नहीं है, बल्कि आपके साथ जो पसंदीदा समय बिताने की तीव्र इच्छा को दर्शाता है, जिसमें चाय बस एक बहाना या एक आरामदायक, मेलजोल गतिविधि का हिस्सा है। संक्षेप में “मुझे आपके साथ चाय पीना बहुत पसंद है, यह मेरे लिए एक जुनून जैसा है।”

​यह जुनून अक्सर किसी करीबी या रिश्ते या प्यार में इस्तेमाल होता है, जहां सादगी भरे पल भी खास बोल बन जाते हैं आओ
एक-एक कप चाय हो जाए, साथ पीलें फिर हाथ आया यह पल
कल हो ना हो, आएं चाय पी लें और इस यादगार पल की मस्ती
को समेटे।

आइए तरह-तरह का स्वाद पीलें काली, नमक वाली, निंबू वाली, दूध वाली, अधिक शक्कर, मीठी या मीडियम मीठी, कड़क पत्ती वाली या सामान्य, मसाले लौंग – कालीमिर्च – अदरक – सौंठ वाली या फिर चाकलेटी स्वाद वाली, दूधिया इलाइची स्वाद वाली या मलाई वाली और तो और तुलसी पत्ते वाली, वानस्पतिक हर्बल जड़ी-बूटियों वाली चाय शरीर को ताजगी, स्फूर्ति देती हैं, सिरदर्द बंद करती है मन प्रसन्न रहता है और शरीर रिलेक्स करता है, मांसपेशियों में ऊर्जा भर जाती है जनाब
ये भारत है यहां किस्मों-किस्मों की चाय मिलती है।

चाय तो वह पेय हैं जो नवऊर्जा देती है चाय पर सैंकड़ों लेख-काव्य लिखे जा सकते हैं, चाय पर बैठक हों तो बड़े-बड़े फैसलें
हो जाते हैं, पीने पिलाने पर अनेक प्रैंक – मजाक भी बन जाते हैं।
दोस्तों चाय एक मस्ती भरी ऊर्जा है। चाय मिलने में देरी हो तो आह निकल जाती है, समय पर चाय मिलने पर वाह निकल जाती है तो आह चाय, वाह-वाह चाय।

​ फितूर – फितूर – चाय का फितूर,
तेरे संग चाय पीने का हां फितूर,
अगर चाय गरम हो मतवाली हो,
संग में खुबसूरत दिलवाली हो तो
ऐसी चाय पीने में भी आएगा शुरूर,
अरे ओ हूजूर, चाय पीजिएगा जरूर।।

– मदन वर्मा ” माणिक ”
इंदौर , मध्यप्रदेश

दिनांक 15.12.2025

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