साहित्य
दिल के लिए दिसंबर

जा रहा लेकर यह वर्ष अब ,
बना दिल के लिए दिसंबर ।
कुछ लोगों ने सम्मान दिया ,
कुछ लोगों ने कहा आडंबर ।।
कैसा तेरा भाग्य मैं कहूॅं वर्ष ,
क्या कह दूॅं तेरा यह दुर्भाग्य ।
या कह दूॅं प्यार में ही तुझको ,
जीवन का प्यारा ये सौभाग्य ।।
ले रहा विदा तुम जीवन से ,
कैसे कहूॅं मैं फिर तुम आना ।
जानेवाला पुनः आता है नहीं ,
लद चुका अब तेरा जमाना ।।
आ रहा किसी का रोना तुमपे ,
आ रहा तुमपे कोई हॅंसना ।
कोई कहता है बसना तुझको ,
कोई कहता तुझे है डॅंसना ।।
आना नहीं किसी के झाॅंसे में ,
बहुत ज़ालिम हुआ जमाना ।
हॅंसी खुशी से तुम लो विदा ,
तुझको नहीं है यहाॅं आना ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।


