आलेख

गांव के साधारण शिक्षक डॉ रामशंकर चंचल ने रचा झाबुआ का अद्भुत इतिहास

मध्यप्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े अंचल आदिवासी पिछड़े अंचल में जन्मे डॉ रामशंकर चंचल ने साहित्य जैसे गहन गम्भीर विषय पर झाबुआ को विश्व पटल पर दस्तक दे आज मात्र दो साल में १२ बेहद सार्थक उम्दा सटीक लेखन के साथ चर्चित कृतियों को विश्व धरा पर दस्तक दे अमेज़न पर उपलब्ध कृति आंचलिक झाबुआ को साहित्य में अमर गई इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों को भेंट कर सुखद इतिहास रच दिया जो सदियों जिंदा रहेगा और याद किया जायेगा इस सत्य को स्वीकार करना होगा सत्य सत्य है जो आज सम्पूर्ण विश्व में चर्चित हो चर्चा बना हुआ है कि झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल में आजीवन व्यतीत कर अद्भुत कृतियां सम्पूर्ण विश्व पटल पर दस्तक देना कोइ साधारण बात नहीं है आदरणीय डॉ रामशंकर चंचल की अथक मेहनत और परिश्रम है उनकी सालों की रात भर जाग कि साधना का सुखद परिणाम हैं जो यह साबित करता है कि कर्म पथ पर निष्ठा और आत्मा विश्वास से चला जाए तो कोई भी इतिहास रच सकता है आज देश और दुनिया के सैकड़ों युवा पीढ़ी उनकी प्रेरणा स्रोत बने डॉ रामशंकर चंचल को बेहद आदर से सम्मान से लेते हुए प्रेरणा बने हुए हैं यह झाबुआ की धरा का पुण्य है कि प्रतिभा कोई भी हो किसी शहर की जगह और पद की चेक और जैक की मोहताज नहीं होती हैं
वंदनीय हैं डॉ रामशंकर चंचल जी की साहित्य साधना और तपस्या जो सदियों आदर के साथ विश्व पटल पर दस्तक देगी और याद की जायेगी

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