
“वन्दे मातरम का गीत ”
जन जन के मन में गुंज उठा
वंदे मातरम का अद्भुत गीत
माँ भारती का शृंगार है यह गीत
हम सबका स्वाभिमान है यह गीत
यह गाथा है बलिदानों की
यह सिंचित है वीरों के लहू से
मशाल है वो क्रांति की
जो सबके दिल मे जल उठी
हर जुल्म से लड़ने का इसमें साहस
हर दिल की इसमें पुकार है
इसमें संघर्ष की जय जयकार है
न झुका है सिर हमारा न कभी झुकेगा
आज़ादी के दिवानो की आहुति इसमें
आओ इस गौरवशाली गान को
फिर से हृदय में उतारे हम
नए युग में नई चेतना से
सबका जीवन सँवारें हम
कदम से कदम मिलाकर चलें
गाएँ मिलकर वन्दे मातरम
कवि : नीरज तँवर



