
पूनम का यौवन महके उजियारों सा लगता है।
एक तुम्हारा जीवन बस त्योहारों सा लगता है।
एक तुम्हारी खुशबू से हर चीज महकती उपवन की,
बागों में तिरना खुशबू के फव्वारों सा लगता है।
कल – कल करते झरनों सा मदमस्त तुम्हारा जोबन,
प्यार तुम्हारा सावन के बौछारों सा लगता है।
तितली सी रंगीनी पर निशि दिन भौरों का मड़राना,
फूल और कलियों का खिलना सुर्ख़ बहारों सा लगता है।
आंखों -आंखों रहना जिसका पूजन व आराधन में,
यादों में लहरों का उठना मझधारों सा लगता है।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890



