आदिवासी सृजन का अद्भुत मसीहा डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ
मध्य प्रदेश के आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ में जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल ने सालों से सतत् साधना और तपस्या करते हुए, अपने जीवन में आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ की आवाज़ बन गए है उन्होंने अनेक बल कृतियों के माध्यम से, आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ के जन जीवन परिवेश आदि आदि विषयों पर मौलिक सोच और चिंतन लिए अनेक बाल कथार , उपन्यास और कविताओं का अथाह लेखन करते हुए पर्याप्त कार्य किया है सर्जन किय है जो देश के चर्चित बड़े प्रकाशक अनुभूति प्रकाशन , जन चेतना प्रकाशन, नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली आदि आदि से प्रकाशन हुआ और सम्पूर्ण देश में साहित्य जगत में ग्रामीण वाचनालय में , पाठ्य पुस्तकों में अपना महत्वपूर्ण अस्तित्व लिए
आज देश के अनेक हिन्दी प्रान्त में चर्चित हो चर्चा बन गए है
डॉ रामशंकर चंचल ने सारी जिंदगी हिंदी भाषा में सृजन उपलब्धि लिए सैकड़ो कृतियों द्वारा झाबुआ को अमर कर दिया है गर्व है कि आज
इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई जैसे बड़े प्रकाशक चर्चित प्रकाशन से उनकी अद्भुत 14 वीं अमेज़न कृति आई है
सुख सुकून मिलता है कि उनकी आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ के जन जीवन पर दस्तक देती कथाओं की अंग्रेजी अनुवाद डॉ पुलकिता सिंह आनंद द्वारा किया गया है वह अद्भुत कृति भी दिल्ली के बहुत बड़े प्रकाशक से प्रकाशन हुआ है और अमेज़न पर उपलब्ध हो बेहद चर्चित हो चर्चा बन गई है
आज देश के इतिहास में पहली बार डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी अद्भुत पहचान बनाई है और लाखों चाहने वालों को हिंदी भाषा में सृजन के लिए प्रेरित करने के साथ साथ देश को, विश्व धरा पर दस्तक दे झाबुआ मध्य प्रदेश को पूर्ण आस्था से अस्तित्व से उसके जीवन दर्शन, पर्व
त्योहार लॉक संस्कृति आदि आदि सैकड़ों विषयों पर मौलिक लेखन के द्वारा सामने लाए हैं उनकी पीड़ा दर्द को अपनी पीड़ा और दृढ़ समझ कार अद्भुत जीवंत सजीव सृजन करती हुई आज सांप विश्व में चर्चित हो चर्चा बन गए है
हिंदी साहित्य को सचमुच बेहद गर्व है कि झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल पर दस्तक देता अथाह लेखन आज देश और विश्व में साहित्य जगत में चर्चित हो गया है
जिसका सम्पूर्ण श्रेय डॉ रामशंकर चंचल जी की साहित्य साधना और तपस्या को है और डॉ रामशंकर चंचल की सहजता सरलता यह है कि आज वो संपूर्ण श्रेय ईश्वर कृपा को और झाबुआ की पावन पवित्र धरती को देते हुए वंदन करते हैं




