
दिल की कलम में दर्द की स्याही भरकर,
अपने एहसासों को कागज पर उतरकर।
बीते हुए हर लम्हों को शब्द बनाकर,
आज कुछ लिखा है हमने।
इन आंखों ने जो ख्वाब देखे थे कभी,
पूरी शिद्दत से हमने पूरे किए हैं सभी।
अब जीवन में चाह नहीं है कुछ भी,
फिर भी आज कुछ लिखा है हमने।
किसी के दर्द को मैंने कविता बनाया,
जज्बातों को पिरोकर फिर हार बनाया।
कांटों को हटा जीवन फूलों से सजाया,
किसी की कहानी को लिखा है हमने।
हंसते चेहरे का सारा दर्द जान लेती हूं,
पल भर में गम को पहचान लेती हूं।
मुसीबतों को यूं हंसकर टाल देती हूं,
जीवन के कागज पर फिर लिखा है हमने
सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।



