
सच्चा आंतरिक आनन्द
सर्व -निर्मित होता है
कोई अंत नही अनन्त है।
आनंद ही आनंद है ।
मेरी आंखों में देखो तुम
जीवन सागर सा लहराता है
जीवन से लेकर मृत्यु तक
मैने सबकुछ झेला है।
न शून्य है एवं मोक्ष है
मै ही सागर तल की गहराई
सर्दी, गर्मी बारिश हो
सारे ऋतु की हैं ये पुरवाई।
इंद्रधनुष आकाश है
सारे जग में प्रकाश है
मधुर कोयल सी आवाज है
तो आनन्द ही आनंद है ।
जो लालची है उनके
लोभ से हम मुक्त रहे
भले हमारे पास कुछ भी न हो
आइये हम आनंद में रहे।
किसी से भी घृणा हम न करे
जो हमसे भी घृणा करते है
उनके बीच हम घृणा से
मुक्त रहे आनंद में रहे ।
हर रोग, दुःख और
चिंतन से दूरी बनाए
मन को अपने खुश रखे
आनंद ही आनंद पाए. .!!
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




