साहित्य

आपरेशन सिंदूर

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

हल्दी घाटी से राणा का, स्वाभिमान ललकार रहा है।
कुरूक्षेत्र से वीर पार्थ का,अब गांडीव टंकार रहा है।।

चोट सनातन की गरिमा पर, इसलिए मिसाइल है गरजी।
कान खोल सुन पाक अधर्मी,नहीं चलेगी तेरी मरजी।।

तूने ऐसा दिल दहलाया,जख्म पुराना भरा नही है।
अभी छिपे हैं बहुत घरों में,हर आतंकी मरा नही है।।

भारत मांँ के वीर बांँकुरे, दुश्मन को सबक सिखाएंँ है।
गद्दारो की छाती पर चढ़, अपना निज शौर्य दिखाएंँ है।।

इस बार प्रबल संहार करो, आतंक समूल मिटाना है।
वीरों से भोगित वसुंधरा,उनको यह सत्य बताना है।।

सिंदूर मांँग का बहनों की, क्यों निर्दय पूर्ण उजारा है?
पहलगाम प्रतिशोध हेतु ही, हिंद सैन्य ने ललकारा है।।

आपरेशन सिंदूर से है,आतंकी का शीश उतारा।
पाकिस्तानी तेरे घर में,घुसकर वीरों ने है मारा।।

अभी ठिकाने जले मात्र नौ, आगे भी बहुत जरूरी है।
औलादों से अपनी कह दे,भारत से रखना दूरी है।।

बुरे कर्म का बुरा नतीजा,तेरा काल मंडराया है।
गोलियांँ चली निर्दोषों पर,तेरा विनाश अब आया है।।

तुझको होता यह भान नहीं,तू हरदम मुंँह की खाया है।
संधान अमोघ चला जब -जब,तब तेरा दुर्दिन आया है।।

अभी समय है सोच समझ ले, नहीं बहुत ही पछताएगा।
तेरा तो हथकंडा सारा,तुझ पर भारी पड़ जाएगा।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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