
एक झोंका हवा का जो चल जाएगा।
खूबसूरत यह मौसम बदल जाएगा।
ए कली फूल बनकर न इतना महक।
कोई आया जो भंवरा मचल जाएगा।
ए शमा जलते जलते न इतना दहक।
कोई आएगा परवाना जल जाएगा।
गुलबदन रुत जवाँ है ना श्रृंगार कर।
फरिश्तों का दिल भी पिघल जाएगा।
परमानन्द राठौर गुराडीया




