अंगुरी पकड़ के पहुंचा पकड़े को बेताब आज दुनिया सारी,
भाई,बहन समाज को छोड़ो,ये छोड़ रहे हैं बप्पा महतारी,
चिंता नहीं भगवान की इनको,का कहिहै,तुम्हरे जीवन का,
चुल्लू भर पानी म मरि जाएं, काहे बदनाम होए माता बेचारी।।
बेहाल हो रही ममता मां की,ई मस्त अपन कमावै मा,
कैसे बचेगी मानवता, संकोच करत सब आवै मा,
जब अपनै खून न साथ देत,तौ औरन ते अपेक्षा कैसी,
एकु दिन आइ जब सोचिहौ खुद से,ढुढ़िहौ कुछ पावै मा।।
अवधेश कुमार श्रीवास्तव



