
भगवन जी कृपा ये कर दो,जीवन में बस उमंग ही हो।
अधरों पर हो नाम तुम्हारा, सेवा, सुमिरन, सत्संग हो॥
हृदय में तुम्हारी भक्ति, की धारा ही बहती रहे ।
और जिह्वा बस तुम्हारे ही, शुकरानों को कहती रहे ।
डोर हमारे जीवन की बस, तुमसे जुड़ी ज्यों पतंग ही हो ।
अधरों पर बस नाम तुम्हारा, सेवा सुमिरन सत्संग हो॥
लक्ष्य जहाँ निश्चित हो हमारा, बस एक ही वो पथ रखना ।
दुविधा में कभी मन ये आये, वो नौबत ही मत रखना ।
तुम पर है विश्वास अटल जो, कभी कहीं ना वो कम हो ।
अधरों पर हो नाम तुम्हारा, सेवा, सुमिरन, सत्संग हो॥
अर्ज मेरी है आपसे भगवान, अर्जी मेरी स्वीकार करें ।
धीर नहीं होता है अब तो, शीघ्र ही चमत्कार करें।
मेरे जीवन में आपके उप,कारों से जुड़े प्रसंग ही हों ।
अधरों पर बस नाम तुम्हारा, सेवा, सुमिरन, सत्संग हो॥
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तरप्रदेश




