भ्रष्टाचार की कोख से जन्मा हर घपला नित लाल नया
बस हर बार यह महंगाई बढे जब भी आता साल नया
महंगाई में यह नया साल मनाऊं कैसे बताओ मुझको
रोजी-रोटी के सिंवाआता नहीं मुझे कोई ख्याल नया
अंग्रेज चले गए फिर भी अंग्रेजी के पीछे है पड़े हुए
हिंदी साल क्यों नहीं मनाते खुद से कर यह सवाल नया
अंग्रेजी की टांग खींचकर अब तो हिंदी को जितवाओ
इस बार संसद में जोर शोर से मुद्दा तो यह उछाल नया
नई पीढ़ी को हिंदी महीने भी जरा याद करा दो भाई
सनातनी खुश हो जाएंगे जब कर दोगे यह कमाल नया
पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड




