
हे हंसवाहिनी शारदे माँ,
अज्ञान तम को वार दे माँ।
हे वीणावादिनी वर दे दो,
आलोकित जग कर दे माँ।
माता है अमृत घट प्याला,
कर दो निर्मल तन मन सारा।
विद्या का वरदान मिला तुमसे,
विद्वान बन जाए जग सारा।
झंकृत वीणा तार करो,
माँ शारदे इतना उपकार करो।
श्वेत कमल पर बैठी माता,
सद्बुद्धि दे सुविचार भरो।
माँ तूँ पुस्तिका धारिणी,
वीणा मधुर वादिणी।
मोर मुकुट सर विराजे,
वीणा वादिनी वरदायिणी।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज




