
चाहत की पंख लगा बन जा जाबांज
ग़गन में उड़ जा बन कर तुँ परवाज
दृढ़ इच्छाशक्ति को करना है सलाम
मिल जायेगा जीवन में तुम्हें मुकाम
फर्श पे बैठ मत समय है आज गंवाना
मिहनत को अपना हथियार है बनाना
उम्मीदों की पथ पर है तेरा मुकाम
आँधी भी आये कर्म को दो अंजाम
असफलता झुक कर करेगी सम्मान
कर्म को जब जग में होती है पहचान
संघर्ष जीवन का है शाश्वत पैगाम
विघ्न बाधा भी छुप जाती है तमाम
आओ सपनों का सुन्दर एक महल बनायें
वन उपवन से अपनी ख्वाबों को सजायें
खुशियां भी करेगी तेरी ही जय जयकार
जब बनेगी मिहनत तेरी मजबूत हथियार
जग में वो कर्मवीर हैं अमर वो महान
कर्मयोद्धा बन कर जो आया युद्ध मैदान
उद्यम के आगे झुक गया है कठिन काम
सुकर्म किये जा जग में ओ भले इन्सान
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार



