साहित्य

वादा किया तो….

सुमन बिष्ट

जो कहा है उसे करना, यही इंसान की शान है,
लफ़्ज़ नहीं खिलौने होते, इनमें लफ़्ज़ों की जान है।
वादों की बुनियाद पर ही, रिश्तों का संसार है,
टूटा एक भी वचन अगर, ढह जाता विश्वास है।

बोलकर मुकर जाना जनाब, बेहद आसान काम है,
पर निभा के दिखा देना ही, चरित्र की पहचान है।
ज़ुबान से निकले शब्द कभी, लौटकर आते नहीं,
झूठी दिलासा देकर कोई, सच्चा कहला सकता नहीं।

कदम-कदम पर परखा जाता, वो इंसान का ईमान है
कठिन घड़ी में जो टिक जाए, वही सच्चा इंसान है।
अपना मतलब निकाल लेना, स्वार्थी होने की निशानी है,
सच्चाई पर डटे रहकर,अपनी क़सम निभानी है।

वादा केवल कहने को नहीं, आपका इकरार है,
जो इसे निभा न पाए, ये उसके जीवन पर भार है।
सम्मान वही पाता है जो, कथनी-करनी एक करे,
आँधी आए या तूफ़ाँ आए, वादों से न समझौता करे।

शब्दों की भी क़ीमत होती, यह समझना सीखो तुम,
एक वचन से बनता सम्मान,एक से भंग होता मान।
इसलिए जनाब याद रखना, जीवन का यही सार है,
वादा निभाना ही असल में,सच्चे इंसान की पहचान है।सुमन बिष्ट, नोएडा

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