साहित्य

छब्बीस जनवरी

मीनाक्षी शर्मा मनुश्री

इतराती इठलाती आती हूं मैं
भारत की उपलब्धी गिनवाती हूँ
सर्द हवाओं ने दौड़ी चली आती
सविधान दिवस कहलाती हूँ मैं

भारत माँ का श्रंगार करती हूँ
देश के स्वाभिमान का कारण हूँ मै
सजा दिया मैंने भारत को ऐसा
बिलकुल सोने पर सुहागा जैसा

प्रगति भारत की खूब दर्शाती हूँ
सौंदर्यता में वृद्धि कर जाती हूँ
आकर्षित करती हूँ देसी विदेशी
विश्व में भारत का मान बढ़ती हूँ मैं

देती अवसर प्रतिभा प्रदर्शन का
बढ़ता उत्साह हर नागरिक का
प्रोत्साहित कर पुरस्कृत करती
चिडिया चहक सी रौनक लाती हूँ मैं

भर देती स्फुरण शक्ति मन में
शौर्यता में बढ़ोत्तरी कर जाती हूँ
एक ही दिन में उपस्थित होकर
मिष्ठान वितरण कर जाती हूँ मै

मीनाक्षी शर्मा मनुश्री
गाजियाबाद

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!