साहित्य

गणतंत्र दिवस – गीत संग्रह “वही प्रिय गीत हैं मेरे” से

राम शंकर सिंह

अपना शुभ गणतंत्र दिवस है हम सब खुशी मनाएं,
लोकतंत्र की गहरी जड़ को मिल मजबूत बनायें।

26 जनवरी पावन तिथि है संविधान गणतंत्र मिला,
उन्नीस सौ पच्चास ईसवी भारत का तब भाग्य खुला,
वीरों ने जड़ लहू से सींचा लोकतंत्र तरु पाये।
लोकतंत्र की गहरी जड़ को मिल मज़बूत बनायें।

नींव में इसके त्याग शौर्य है ऊपर सुख की आशा,
आज़ादी फल मिला तभी तो पूर्ण हुई अभिलाषा,
हुए निछावर जो भी इस पर उनकी याद दिलाएं।
लोकतंत्र की गहरी जड़ को मिल मजबूत बनाएं।

सुई हिन्द में आयातित थी “तेजस” आज बनाते,
अन्न कभी कुछ कम पड़ता था अब निर्यात कराते,
आँख दिखा जो हमें डराए अब हमसे डर जाएँ।
लोकतंत्र की गहरी जड़ को मिल मजबूत बनाएं।

हिन्द हमारी आन- बान है और तिरंगा शान है,
माटी इसकी रोली चंदन कण- कण में भगवान है,
संस्कृति अपनी पूज्य जगत में इसका मान बढ़ाएं।
लोकतंत्र की गहरी जड़ को मिल मजबूत बनायें।

राम शंकर सिंह

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