
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।
हम न आयेंगे फिर कभी जो तुम बुलाओगे।
तन्हा होकर के भी तन्हा न रह पाओगे।
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।।
याद में मेरी रोना भी अगर चाहोगे।
सूखे पत्तों से खुद ही बिखर जाओगे।
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।।
दोगे आवाज हमें फिर भी न सुना पाओगे।
अपनी आवाज में खुद को ही भूल जाओगे।
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।।
साथ होगी दुनिया न मुझको पाओगे।
लम्हें लम्हें में खुद को आप ही मिटाओगे।
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।।
हम न आयेंगे फिर कभी जो तुम बुलाओगे।
धीरे धीरे हौले हौले ना ‘दर्श’ पाओगे।
तुम मेरे बाद मोहब्बत को तरस जाओगे।।
कवि,लेखक,
ग़ज़लगीतकार,
साहित्यकार:-
धीरज कुमार शुक्ला’दर्श’
ग्राम-पिपलाज,तहसील-खानपुर,जिला-झालावाड़,राजस्थान (३२६०३८)



