साहित्य

ग़ज़ल- राधाकृष्ण सा प्रेम

प्रिया काम्बोज प्रिया

 

ना खोल वो पुराने खत , उन्हें बंद ही रहने दो ना
राज है जो तेरे मेरे बीच में, उन्हें राज ही रहने दो ना
देखा जो अनकहा सा प्यार वो, नजरों में तेरी
नजरों का वो प्यार, प्यार ही रहने दो ना

ना बंध सके इस रिश्ते को,बेनाम ही रहने दो ना
चाहत की नदियां को ,बेरोक बहता ही रहने दो ना
साथ हो मेरे ,दिल में बसे रहते हो हर पल
साथ को मेरे अब बेमजिंल ही रहने दो ना

परछाई बन मेरी रूह में बसा ही रहने दो ना
ना रोक इस खुमारी को इस महक में महकने दो ना
ना कर अंत इस मोहब्बत का “प्रिया”तू मेरी
राधाकृष्ण सा बना प्रेम अंत काल तक रहने दो ना

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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