साहित्य

वसन्त के स्वागत में दो छ्न्द

आशा बिसारिया

आयो है ऋतुराज वसन्त ,
धरा पै राज करन की है ठानी,
आम के बौरौं में फूल्यो फिरै अरु,
भ्रमरन मिस जे करै मनमानी।
नवपल्लव नवकलियाँ फूटीं,
मंद समीर सों धरती सानी ,
नवजुवतिन को कटाक्ष भयो है,
मिलि कै करौ याकी अगवानी।।
*
काम के कौतुक देखो सखि ,
जे फूलन के मिस बान चलावे
हिय में बसे जो प्रेम के अंकुर,
मलयानिल सों उन्हें सरसावे।
बौरन ते बरजोरी करै ,
सहकारन माँहि ठड़ो मुस्कावे,
अलियन माँहि उमंग भरे अरु,
कोयल की कूक में तान सुनावे।।
आशा बिसारिया चंदौसी

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