
हमारे वतन का परचम तिरंगा जान से बढ़कर।
रहा हूं कर गुजारिश ये मिला वरदान से बढ़कर।
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विकास पथ पर बढ़ते कदम पीछे ना मुड़ेगे ये,
डगर कंक्रीट की है देख ले अभिमान से बढ़कर।
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नहीं है देश से गर प्यार तो जीना हुआ कैसे,
जवानों को दिखे भारत हमेशा शान से बढ़कर।
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जियो ऐसे करें तारीफ ये दुनिया तुम्हारी ही,
सदा कर काम अच्छे ही रहोगे मान से बढ़कर।
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खुशी उपकार से मिलती नहीं नफरत “सुमन” करती,
करो वंदन शिवा शिव का तराने गान से बढ़कर।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




