
परिवार आवश्यक है,
मित्रता आवश्यक है,
संबंध भी जीवन की धरोहर हैं।
पर हर कठिन मोड़ पर
जीवन यह भी सिखा जाता है
कि अकेले रहने की कला
भी उतनी ही ज़रूरी है।
भीड़ में जब समझ न आए कोई,
और अपने भी मौन हो जाएँ,
तब खुद का हाथ थाम लेना
सबसे बड़ी समझ बन जाता है।
दूसरों पर टिके रहना आसान है,
पर स्वयं का सहारा बनना
जीवन की सबसे कठिन
और सबसे सुंदर साधना है।
क्योंकि जो अकेले रहना सीख ले,
वह कभी भीतर से टूटता नहीं—
वह बस और गहराई से
खुद से जुड़ जाता है।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️




