
छुप-छुप अश्रु बहाने वालों,
मोती व्यर्थ लुटाने वालों,
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन मरा नही करते हैं।
ठोकर खाकर जो गिरते हैं,
वे चलना फिर से सीखते हैं,
हर दर्द एक हिम्मत पहचान बनती
जीवन यही सिखाता हैं।
जो टूटा है, वह बिखरा है
जो हारा है, वह थका है
अंधेरों से जो आँख मिलाए,
वो दीपक बनकर जलते हैं।
कल फिर से पंख उगेंगे ही,
विश्वास अगर जिंदा होगा,
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करते हैं।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️




