साहित्य

मुझे देने बैठ गया ज्ञान

पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़ 

मेरा एक दोस्त नादान
मुझे देने बैठ गया ज्ञान
आदमी के संस्कारों का आजकल बुरा हाल है
इसकी नजर में किसी की जवान बहू बेटी केवल Tanच माल है
बेशक उसका एक सवाल लाख का था
मगर इधर सवाल आदमी की साख काथा
मैंने कहा हमेशा आदमी पर ही क्यों उठता सवाल है
जबकि अंतरिक्ष में इससे भी ज्यादा बुरा हाल है
इंद्र का अहिल्या प्रकरण तो सब बताते हैं लेकिन सूरज के बारे में बताने से सब कतराते हैं
जबकि सूरज बाहर से ही नहीं अंदर से भी बहुत तेज है
इश्क के मामले में अंग्रेजों का भी अंग्रेज है
या यू कहो सूरज इतना बड़ा फंटू बज है
उसके राज को जानता सिर्फ यह पुष्पराज है
उठते ही सबसे पहले देता है सुरभि और उषा को आवाज
घर से निकलता है किरण के साथ
दिन भर रहता है रोशनी के साथ
शाम को जाता है संध्या के साथ
एक दिन भाई का खुल गया राज
वर्षा रानी भड़क गई हो गई नाराज
जान बचाने को छुप गया मेघा के साथ
उसे भी चक्कर दे गया सोया रजनी और निशा के साथ
एक दिन सुबह-सुबह मुझे मिला
मैंने कहा यार बंद कर अब यह सिलसिला
मेरे भाव को समझ कर
कहने लगा हंसकर
यह सब मेरी चमक दमक पर मरती है
वरना बताओ मेरे लिए क्या करती है
मैं तो सिर्फ भूमि से करता हूं प्यार
जिस दिन करना चाहता हूं इजहार
चांद बीच में आकर रोड़ा बन जाता है
वह भी उसके रोज चक्कर लगाता है
भूमि और मैं दो जिस्म एक जान है
बाकी सब दिल बहलाने के समान है
इसलिए प्यारे भुलक्कड़
दुनिया वालों के चक्कर में मत पड़
यह तो मुझ पर भी लगाते हैं क्लेम
कि तू धरती पर आया तूने कुंती से किया प्रेम
करण को बताते हैं मेरी संतान
सूत पुत्र कहकर करते हैं उसका भी अपमान
जबकि मैं आज तक अपनी जगह से एक इंच नहीं हिला
तो बताओ फिर कुंती से कैसे मिला
मैं भूमि से मिलता हुआ दिखता जरूर
लेकिन हकीकत में कभी नहीं मिलता हुजूर
वैज्ञानिकों की भाषा में वह हमारी क्षैतिज अवस्था है
क्योंकि प्रकृति की ऐसी ही व्यवस्था है
वरना मैं तो जैसा कल था वैसा ही आज हूं
बस तेरी नजर में न जाने क्यों फंटू बाज हूं

पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार  गांव  हरिद्वार उत्तराखंड

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