
हृदय की हर धड़कन की कहानी हिन्दी है,
माँ की लोरी, देश की जुबानी हिन्दी है।
न वेदों से अलग है, न आधुनिक से दूरी है,
संस्कृति की धरोहर, विज्ञान की वाणी हिन्दी है।
जो जोड़ दे किसान को भी शिखर विज्ञान से,
ऐसी सरल, सहज, सबकी निशानी हिन्दी है।
न बाज़ार में झुकी, न सत्ता की परछाईं बनी,
स्वाभिमान की सीधी-सच्ची रवानी हिन्दी है।
जब संविधान ने अधिकारों का अर्थ समझाया,
कर्तव्यों की सबसे पहली जुबानी हिन्दी है।
न सीमा में बँधी, न किसी वर्ग की कैदी रही,
विश्व-पटल पर भारत की पहचान हिन्दी है।
दूर देशों में भी जब अपनापन सा जाग उठे,
दिल से निकली जो आवाज़,वही तो हिन्दी है।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




