
मेरी प्रेम कहानी का तुम श्रृंगार करोगे क्या,
मेरी प्रीत कहानी के तुम किरदार बनोगे क्या।
करती हूँ मैं प्रेम जो तुमसे मेरी प्रीत बनोगे क्या,
मैं नदिया सी बहती आई सागर मेरे बनोगे क्या, ।
मेरे इन खामोश लबों पर कुछ शब्द कहोगे क्या,
ख्वाबों के अल्फ़ाज़ मेरे लबों पर लिखोगे क्या।
पतझड़ होकर गिर जाती धरा पर सम्भालोगे क्या,
मेरे बसंत बयार तुम बनकर फूल खिलोगे क्या।
मैं लिखती हूँ गीत सदा तुम शब्द बनोगे क्या,
देकर अपनी आवाज हमें संगीत बनोगे क्या।
में बन जाती तेरी राधा मेरे कान्हा बनोगे क्या
अपनी मधुर मुरलिया की तान बनाओगे क्या।
मैने ख्वाब सुनहरे सजाये आकर पूरा करोगे क्या
मैं ख्वाबों की प्रीत हूँ तेरी मेरे मीत बनोगे क्या।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




