
यह मेरा अनुपम तिरंगा,
लहर लहर लहराए रे!
माँ भारती मुस्काए, तिरंगा
लहर लहर लहराए रे।

इस झंडे का शहीदों ने,
कैसा मान बढ़ाया है
लाल किले की प्राचीर पर,
तभी यह झंडा फहराया रे!
माह जनवरी छब्बीस को
हम,सब गणतंत्र मनाते हैं,
और तिरंगे को फहरा कर
गीत ख़ुशी के गाते हैं।
आज नई सज-धज से देखो
गणतंत्र दिवस फिर आया है।
नव परिधान बसंती रंग का
वीरों ने खुद को पहनाया है।
भीड़ बढ़ी स्वागत करने को
मौसम रंग दिखलाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों के संग
ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।
धरती मांँ मुक्ता जड़ित हो
स्व श्रृंगार करवाए है,
देखो-देखो आज तो अपना
७७वां गणतंत्र-दिवस आया है।
भारत की इस अखंडता को
तिलभर आंँच न आने पाए।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
मिलजुल इसकी शान बढ़ाएंँ।
युवा वर्ग सक्षम हाथों से
आगे इसको सदा बढ़ाएंँ।
इसकी रक्षा में वीरों ने
अपना रक्त बहाया है।
मेरा भारत, मेरी मातृभूमि!
तू है अद्भुत और सुंदर।
तेरी धरती, तेरा आकाश,
तेरी नदियाँ, तेरे पर्वत,
सब अद्भुत अविस्मरणीय हैं।
तेरे लोग, तेरे संस्कृति,
तेरी विरासत, तेरा इतिहास,
सब ही गौरवशाली हैं।
तू ही सत्य, तू ही धर्म,
तू ही शांति, तू ही अहिंसा।
तू ही ज्ञान, तू ही दर्शन,
तू ही प्रकाश, तू ही है जीवन।
मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू ही मेरे हृदय में बसे,
तेरी सदैव ऋणी रहूंँगी,
तेरे ऋण से उऋण होने की,
चाहत कभी न पनपने दूँगी।
तेरी गोद में ही तो पुनश्च पुनः जनम लूँगी।।
रचनाकार –
सुषमा श्रीवास्तव,
रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर,उत्तराखंड।




