
देश का विधान बना, अमित निशान बना, विश्व में महान बना, जन-मन भाया है।
न्याय की डगर चली, सत्य की लहर बही, भोर की पहर में, तम को मिटाया है।
शौर्य की मशाल जगे, देश में उबाल जगे, शत्रु का कपाल भगे, काल बन छाया है।
क्रांति की कमान तनी, वीर की उठान यही, हिंद की आन यही, मान को बढ़ाया है।
वीरों की कहानी कहे, त्याग की निशानी बन, गंगा-सा जो बहता वो, पावन कहाता है।
एकता की डोर बँधी, भव्य भोर आज सधी, शांति की सुवास चढ़ी, गौरव बढ़ाया है।
ध्वज की उड़ान देखो, ऊँची ये ढलान देखो, वीरों की थकान देखो, लहू रंग लाया है।
सीमा के जवान खड़े, पर्वत समान अड़े, संकट से जा भिड़े, शीश ना झुकाया है।
भ्रष्ट को हटाएँगे हम, श्रेष्ठ को लाएँगे हम, गीत यही गाएँगे हम, पर्व मन भाया है।
हिंद के दुलारे हम, जग के सितारे हम, नदियों की धारे हम, अमृत बहायेंगे।
पूर्णिमा सुमन
झारखंड धनबाद




