साहित्य

जीवन का हिसाब-किताब

पूनम त्रिपाठी

 

जीवन के तराजू पर,
सपनों का वजन रखा,
कुछ पूरे हो पाए, कुछ
राह में ही ढह गए।

आपने मेहनत का
ब्यौरा, हर दिन में जोड़ा,
पर वक्त के खाते में, कई पल यूँ ही बह गए।

कभी किस्मत ने ब्याज लिया,
खुशियों के सिक्कों पर,
कभी हालात ने उधार रख दी, उम्मीदों की पर्ची पर

फिर भी आप चलते रहे, घाटे में भी मुस्कुराकर,
क्योंकि दिल का व्यापार, हौसले से ही चलता है l

अब पीछे मुड़कर देखिए, तो क्या हानि क्या लाभ,
हर अनुभव ही पूँजी है,
हर आँसू है हिसाब।

जीत-हार सब दर्ज हैं, जीवन की पोटली में,
जिंदगी का असली लाभ – प्यार, और शांति में

फिर भी ये व्यापार सुन्दर है, उतार-चढ़ाव के संग,
क्योंकि आपका दिल जानता है, हर दिन नया रंग।

जीवन का हिसाब-किताब कभी न पूरा होता,है
पर चलते रहने में ही, उसका असली सौंदर्य है।

पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर

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