साहित्य

कलमकार का धर्म

डॉ. पुष्पा सिंह

सदा सत्य की राह दिखाएँ
कलाम कर का धर्म।
पाठक भी जागृत हो जाएँ
शब्द शब्द हो नर्म।

कोरोना से रचते सारे
लेखक की भरमार।
भाव उजागर करते हैं हम
सरल सहज उद्गार।

दीन हीन की पीड़ा रचते
करते हम सत्कर्म।
पाठक भी जागृत हो जाएँ
शब्द शब्द सब नर्म।

समय बिताते पढ़ लिखकर
लेखन में रख ध्यान।
अपने में तल्लीन रहे हम
अर्जित करते ज्ञान।

पुस्तक पर पुस्तक छपती हैं
मनभावन यह कर्म।
पाठक भी जागृत हो जाएँ
शब्द शब्द हो नर्म।
डॉ. पुष्पा सिंह

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