
सर्द हवा अब नित्य सुहावन
मौसम नर्म हुआ मनमीत।
नित्य सुहावन है मनभावन
होठ सजे शुचि श्रव्य सुगीत॥
कोयल नित्य सुनावत गावत
मोहक मादक राग सुभीत।
संग सखा सब नाचत गावत
कृष्ण सुनावत गीत सुप्रीत॥(१)
सूरज देर सुभोर दिखे अब
पादप पर्ण ढ़के पृथु ओस।
दीर्घ हुए निशि रैन सभी शुभ
कंबल गर्म करे शुचि ठोस॥
मोहक मूँगफली मनभावन
आग अलाव अभीष्ट भरोस॥
नित्य मिले गृह भीतर राहत
तापत हैं सब आग पड़ोस॥(२)
डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




