साहित्य

कुहासे के उस पार

सुमन पंत 'सुरभि'


आंग्ल नूतनवर्षाभिनंदन 2026

चलो चलते हैं कुहासे के उस पार,
जहां नई उम्मीदें करती हैं संचार।
जहां सूरज की पहली किरण मुस्कराए,
हर दिल में एक नया सपना सजाए।

कुहासा जो है मन की निराशा का
पुरातन सोच से उपजी हताशा का,
बंदिशों का अंधेरा जब आंखों को धुंधलाए
अंतरात्मा की लौ तब आशा के दीप जलाए।

कुहासे के तिमिर में छुपे अज्ञात राज़,
हर कदम पर रोकने को देते हैं आवाज़।
धुंध में लिपटी मूक बेड़ियों –सी बाहें,
साहस से ही पार होंगी ये अनजानी राहें।

हर घड़ी, हर पल में नया विश्वास जगे,
हर सपने को सच बनाने की लगन लगे।
तो आओ! मिलकर करें नया संकल्प,
जीवन में चुनें हम खुशियों के प्रकल्प।

बीते पलों को विदा करें प्यार से,
आगे बढ़ें हम नई सोच के द्वार से।
आसमां के तले बिखरी हैं खुशियां अपार,
चलो चलते हैं कुहासे के उस पार।

अविश्वास को छोड़, लें विश्वास को थाम,
चलो करें उस पार बसे सपनों को अपने नाम।
कुहासे के परदे से, कहो कैसा डरना ,
उसके पार है जीवन का असली झरना।

तो चलो! बढ़ाएं कदम अभी, इसी पल,
नववर्ष की नव भोर का करें स्वागत सरल।
स्वप्न नए अपनाने को हो लें हम तैयार,
चलो चलते हैं कुहासे के उस पार।।
– सुमन पंत ‘सुरभि’

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