
अतीत का इतिहास, वर्तमान का आभास,
भविष्य का दर्पण,समेटे हुए हर अहसास,
रचने वाली कलम कैसे रहे आधी – अधूरी,
कविता सम्पूर्ण स्वयं में भरे हृदय उजास,
भावों का सवेरा विहंग सा उड़ता मन,
खिलती कविता ज्यों सुमन मकरंद,
सजग संसार विचरे कागज की धरा पर,
कविताओं की किरणों से स्वर्णिम हर क्षण,
मन के दबे भाव और दर्द के घाव,
प्रेम के स्वप्न और संबधों के रत्न,
कलम के धागे से पिरोती कविता,
जगत में हर क्षण शब्दों की माला,
प्रतिपल बने स्वप्न संसार कलम से,
प्रेम की वर्षा से सिंचित अक्षरों से,
लेखक की लेखनी से उगती कविताएँ,
तृप्त कर देती मन को अन्न क्षुधा से,
रश्मि मृदुलिका
देहरादून उत्तराखण्ड




