साहित्य

माँ सरस्वती

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

मातु शारदे द्वार तिहारे, लेकर आई आस।
भाव लेखनी हमें दीजिये, अंतस करो उजास।।

माँ सब पर अब कृपा कीजिये, दूर करो अज्ञान।
झोली फैलाए सब जग खड़ा, देदो विद्या दान।।

माँ सरस्वती सदा कृपा कर, वाणी नवरस घोल।
सुखमय सुरभित‌संसार करें, भाव भरें अनमोल।।

बसंत पंचमी दिन मातु का, पूजा करते आज
माँ सरस्वती वर देती है, बजते रहते साज।।

मन को बहुत लुभाते रहते, त्योहारों के रंग।
रंग बिरंगा गगन लगे जब, उड़ती रहे पतंग।।

छाया है उल्लास जगत में, मुस्कुराये बसंत।
वन उपवनसबडाली झूमे, खुशियाँ रहें अनन्त।।

मौसम ने ली करवट देखो, सूरज बदली चाल।
कलरव करते पंछी बैठे, बजती सुरमय ताल।।

माघ महीना पावन संगम, डुबकी लगती रात।
त्योहारों के रंगखिलेहैं, खुशियों की सौगात।।

आहट पाकर के बसंतकी,कोहरा हुआ अपंग।
मनउल्लासितमुखर हुआ जब, छाई नईउमंग।।

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!