साहित्य

मातृभूमि की पावन मिट्टी

उदय किशोर साह

अय मेरे मातृभूमि की पावन मिट्टी
तुझपे है मेरा ये जीवन      कुर्वान
तुँ ने दी है ये तन और मन की धन
तुँ है हमारा प्यारा देश   हिन्दुस्तान

तुझमें पाया है ये    पावन सी गंगा
तुझमें खड़ा है  हिमालय की  शान
तेरे आँचल में है हरियाली  उपवन
तेरे गोद में है बैकुंठ का वो   धाम

अय मेरे मातृभुमि की पावन मिट्टी
तुझसे पाया है हम जीवन अरमान
तेरे ही मिट्टी से है ये हमारी रौनक
तुँने दी है हमें भारतीयता पहचान

तेरे पाँव पखारती है गहरी सागर
तेरे ही गोद में है    सुकुन विश्राम
तेरे अन्न जल पर    पले बढ़े   हम
विश्व पटल पे हो    हमारी तूँ शान

तेरे तिरंगा   आसमान पे लहराये
देते हो जग को   शांति की पैगाम
हम पे बुरी नजर   रखने वाले सुन
काल बन कर कर देगें काम तमाम

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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