
मेरी विनय अर्चना अर्पित है
माँ वाणी तेरे चरणों में
हृदय की श्रद्धा समर्पित है
माँ भारती तेरे चरणों में…..
माँ! दूर करो अज्ञान अंधेरा
जग में भर दो उजियार
बुद्धि, विवेक का दे वरदान
उज्ज्वल कर दो संसार
ज्ञान का दो आशीष हमें
नत मस्तक तेरे चरणों में…..
तुमसे ही सुर, लय, संगीत
तुमसे ही शोभा अनन्य
झंकृत कर वीणा के तार
कर दो, कर दो जीवन धन्य
मन भावों से पुलकित है
सुरपूजिता तेरे चरणों में…..
कृपा अपनी बरसा देना
कल्मष-कलुष मिटा देना
सुमति, सुविचार जगा कर
सद्गुण-सद्भाव सजा देना
सौंप दी जीवन की नैया
भवतारिणी तेरे चरणों में….।
मीना जैन
इंदिरापुरम, गाजियाबाद।




