साहित्य

सरस्वती वंदना

सुषमा दीक्षित शुक्ला

हे! हंसवाहिनी माता
अब हम पे रहम करना ।2
हम तेरे ही बालक हैं ,
माँ हमपे करम करना ।2

सुन मेरी करुण कहानी ।
माँ दूर करो नादानी ।
मैं दुर्बल सठ अभिमानी ।
ना तुमसा है कोई दानी ।2

है माँ बालक का नाता
ये सोच क्षमा करना ।2
हे हंसवाहिनी माता ,
अब हमपे रहम करना ।2

अज्ञान का मुझ पर साया ।
जीवन मे अंधेरा छाया ।
अब कोई नज़र ना आया ।
माँ तेरी शरण मैं आया ।

मैं याचक हूँ तुम दाता ,
माँ मुझपे दया करना ।2
हे हंसवाहिनी माता
अब हमपे रहम करना ।

सुषमा दीक्षित शुक्ला

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