
मेरे एहसास
काश तुम देखे होते
हर रातों के रतजगे
तुम्हारे यादों का वो लंबा सफर
जो पूरी रात साथ सफर किया करते हैं
दिन के उजाले कुछ तुम्हारी यादें
कुछ जिम्मेदारियां ले जाती हैं
मेरी आंखों के काले पड़े घेरे
तुमने देखे ही नहीं इन्हें
ये तुम्हारी ही कहानियां कहती हैं।
तृषा सिंह
देवघर झारखंड




