साहित्य

अटल बिहारी वाजपेई

प्रिया काम्बोज प्रिया

 

अटल है तू, अटल है तू,अटल है तू
धरती मां का लाल वो पर्वत अटल है तू

हार ना मानी कभी ,ना गैरों सा गले लगाया है
कलम से लिखी इबारत नया इतिहास रचाया है
राजनीति दलदल मे खिला राष्ट्र हित का कवल है तू
अटल है तू अटल है तू,,,,,,,,,,,,,
ना शीश झुकाया कभी ना झुकने दिया
दिनकर सा इस का दीया फिर जलने दिया
विशाल गगन में तमका वो धुव्र तारा है तू
अटल है तू अटल है तू,,,,,,,,,,,,
विकास की राह में राष्ट् का निर्माण किया
भारत को दिलाई पहचान विश्व में नाम किया
दृढ़ संकल्प से जन-मानस का विश्वास है तू
अटल है तू अटल है तू ,,,,,,,,,,
जलना होगा गलना होगा कदम मिलाकर चलना होगा
सुशासन की राह पर सुशासन दिवस मानना होगा
जो  न बुझ सका वो इस का दीया है तू
अटल है तू अटल है तू,,,,,,,,,,,,
हिन्दू राष्ट्र का सम्मान सनातन की पहचान है
दृढ़ निश्चय सा निश्छल सौम्य स्वभाव है
हृदय में करूणा बसे दिल में राष्ट्रप्रेम बसाए है तू
अटल है तू अटल है तू,,,,,,,,,,,,,
कृष्णा कृष्ण बिहारी का वो लाल मानव नेक हैं
छल-कपट से दूर आत्मा वो एक देव विशेष है
अटल ,मात्र नाम नहीं एकता का संदेश है तू
अटल है तू,अटल है तू,,,,,,,,,,,,
भारत-रत्न पद्मविभूषण मिले रत्न उस भारत रत्न को
लोक मान्य तिलक,तिलक माथे अटल सजा है जो
चीर निशा का वक्ष पुनः चमकेगा वो दिनकर है तू
अटल है तू अटल है तू,,,,,,,,,,

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍️ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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