
देखो आई मकरसंक्रांति,खुशियाँ लाई साथ अनेक,
पूरब से दक्षिण तलक है धूम मचाई,
भारत के त्योहारों की रेलमपेल मचाई,
शुभ त्यौहारों और शुभ कार्यों की हुईं शुरुआत,
घर -मंदिर सब ओर बजे बधाई।
सूर्य उदित होने से ही जग का तम मिट जाता है,
मकर राशि में किरणें आतीं, शीत स्वयं छिप जाता है।
भानु-रश्मियांँ भाषित करतीं अचर -सचर की आशा,
लोहड़ी ,खिचड़ी उत्तरायणी ,
बिहु, पोंगल इन सब नामों से
जीवन मधुमय बन जाता है।
अनेकता में एकता का,
कैसा अद्भुत उद्धरण है।
तीज – त्यौहारों से श्रृंगारित,
भारत विश्व में शीर्ष पर है।
जिसका सब अभिनंदन करते,
ऐसा अद्वितीय हमारा भारत है।
रचयिता –
सुषमा श्रीवास्तव
मौलिक कृति




