साहित्य

मकर संक्रांति

अंजलि गोयल 'अंजू '

मिसेज वर्मा पूरे मौहल्ले में अकेली ऐसी महिला हैं जिन्हें हर किसी के घर के बारे में जानने की उत्सुकता हमेशा बनी रहती है•••किसी के घर में क्या हो रहा है, क्यूँ हो रहा है,कैसे , क्यूँ नहीं ?? दो महीने पहले ही शर्मा जी के बेटे की शादी बहुत धूमधाम से हुई और शादी के बाद संक्रांति का पहला त्यौहार आया । मिसेज शर्मा ने सभी के यहाँ बहू के घर से आया सामान भेजा•••भाजी देखकर मिसेज वर्मा की आँखे खुली की खुली रह गयीं सोचने लगी अरे! इतनी भाजी,इतनी तो आजतक किसी के यहाँ से नहीं आयी•••बड़ी ही किस्मत वाली हैं मिसेज शर्मा। दोपहर बड़ी मुश्किल से कटी,शाम होते ही जा पहुँची उनके घर। मिसेज शर्मा फूली नहीं समा रहीं थीं उन्होनें खुशी-खुशी सारा सामान दिखलाया कहने लगी ” सबके गर्म कपड़ें हैं, ठंडे कपड़ें हैं, दो डबल बेड के कम्बल हैं गिफ्ट आइटम हैं, मीठे में पांच किलो गजक दस किलो तिल के लड्डू , पाँच किलो मूंगफली ,नमकीन मठरी और मिठाइयाँ अलग से और भी बहुत कुछ आया है बहू के पीहर से।” मिसेज शर्मा किचन में गईं और खुद ही चाय बनाकर लाईं ।पूँछने पर, “बहू नहीं है क्या ?
“यहीं है..अपने कमरे में है..अभी थोड़ी देर पहले ही सोयी है।” थोड़ा सकुचा के मिसेज़ शर्मा बोलीं
मिसेज वर्मा समान की खूब तारीफ करती हुई और ये सोचते हुए बहू के आने से इनके तो भाग ही खुल गये, अपने घर वापस आ गयीं।घर आकर सोचने लगी सुगन्धा भाभी जी के यहाँ से तो कुछ आया नहीं, उनके भी तो बेटे की शादी हुई थी दिसम्बर में•••बस अगले दिन ही पहुँच गयीं उनके घर।सुगन्धा भाभी ने बड़े आदर के साथ उन्हें ड्राइंग रूम में बैठाया। दो मिनट बाद ही बहू उनके लिए पानी ले आयी और बड़े आदर के साथ दोनों के चरण-स्पर्श कर अपने किचन के काम में लग गई।मिसेज वर्मा धीरे से फुसफुसाई,”बहू के यहाँ से संक्रांति आयी होगी, हाँ-हाँ क्यूँ नहीं ..मैंनें पहले ही संक्रांति का सामान भेजने को मना कर दिया था। उन्होंने तो बहुत कहा परन्तु मैंने ही कह दिया कि बहनजी कुछ भेजने की आवश्यकता नही है , मकर संक्रांति का त्यौहार तो सूर्य नारायण भगवान के पूजन का त्यौहार है इस दिन तो गरीबों को दान दिया जाता है ,भूखों को खाना खिलाया जाता है ,वस्त्र दान किये जाते हैं ,हम जैसे भरे पेट वालों को दान नही दिया जाता आप कृपा कर किसी बालाश्रम, विकलांग आश्रम या कुष्ठ आश्रम में जाकर समान दे आयें ,इससे हमें बहुत खुशी होगी और आपके मन को भी बहुत शांति मिलेगी।” और आपकी बेटी और हमारी बहू को भी उनकी दुआऐं मिलेंगी ,तभी बहू चाय नाश्ता ले आयी और खुद ने भी उनके साथ बैठकर चाय पी। मिसेज वर्मा का मुँह इस समय देखने लायक हो रहा था “बहुत अच्छी बहू है, बहुत संस्कारी है कहकर अपनी झेंप मिटाने लगी और एक नयी सोच लेकर अपने घर आ गयीं वास्तव में कौन है भाग्यशाली मिसेज शर्मा, सुगन्धा भाभी जी,बहू या बहू के पीहर वाले????

अंजलि गोयल ‘अंजू ‘
किरतपुर ( बिजनौर )
उत्तर प्रदेश

रचना स्वरचित व मौलिक है

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