दाता ने है जब दिया, जीवन का यह फूल।
आया है नव वर्ष तो, बीती बातें भूल।।
साथी इस नव वर्ष में, नूतन हो कुछ कार्य।
‘अभिनव’ की इच्छा यही, भारत हो अब आर्य।।
जीवन में सुख हो सदा, संशय से हो दूर।
सब कोई अपना कहे, चमके तेरा नूर।।
*✍🏻आनन्द पाठक ‘अभिनव’ 📝 शिक्षक एवं साहित्यकार*
*शब्द स्पष्टीकरण- (आर्य-श्रेष्ठ)*
*(संशय-अनिश्चितता)*




