
राधे राधे बोल श्याम आएंगे।
राधेश्याम की अद्भुत जोड़ी,
बोला जब जब श्याम तब राधा आई दौड़ी।
जीव आत्मा का मिलन हो जैसे
एसी ही राधा कृष्ण की जोड़ी।
कूंज गलियन हो या यमुना का तट हो।
कदंब का पेड़ हो या बंसी वट हो।
राधा रानी कृष्ण के मन में समाई।
राधा राधा जप के देखो आएंगे कन्हाई।
बंसी की धुन में राधा जी समाई,
उद्धव जी की भी बुद्धि चकराई।
राधा जी को देखे पर लखे कन्हाई।
धरी रह गई सब उनकी चतुराई।
ज्ञान योग भूल गए भक्ति मन में समाई।
कृष्ण राधा में ,
राधा कृष्ण में ,
एक ही आत्मा द्वि रूप में,
पुकारो तुम किसी को भी मन की व्यथा तो दोनों ने मिटाई।
मधु वशिष्ठ, फरीदाबाद, हरियाणा।



