
लोक तंत्र के अमर चितेरे
गीत नया गाते थे
मेधावी व्यक्तित्व समेटे
दूर दृष्टि पाते थे
सौम्य सहज कवि धर्म
अटल जी ने था अपनाया
मैं हार नहीं मानूंगा
यह ही मूल मंत्र था भाया
तर्क पूर्ण निर्णायक कौशल
जन – जन को भाते थे
लोक तंत्र के अमर चितेरे
गीत नया गाते थे
ध्रुव से अटल इरादे जिनके
कहीं नहीं डिग पाए
राजनीति के बने पारखी
जन गण मन में छाए
संघर्षों में रहें समर्पित
सबको बतलाते थे
लोक तंत्र के अमर चितेरे
गीत नया गाते थे
देश भक्त थे अटल
विरोधी दल ने लोहा माना
भारत रत्न अटल जी के
उस दृष्टिकोण को जाना
शब्द – शब्द में प्रखर वाणी
से मन को हरषाते थे
लोक तंत्र के अमर चितेरे
गीत नया गाते थे
श्रद्धा सुमन समर्पित करते
हैं हम अंजुरियों से
अटल सदा ही अटल रहेंगे
सुधि में अभिनंदन से
राजनीति औ काव्यकला
में घुल मिल जाते थे
लोक तंत्र के अमर चितेरे
गीत नया गाते थे
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शिव कुमार चंदन रामपुर
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